Top 10+ मैहर में घूमने की जगह – Maihar Devi Temple

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Maihar Devi Temple :- मैहर, मध्य प्रदेश के सतना जिले में स्थित एक खूबसूरत शहर है। यह शहर अपनी प्राकृतिक सुंदरता, धार्मिक महत्व और ऐतिहासिक महत्व के लिए जाना जाता है। 

मैहर में घूमने की जगह – Places to visit in Maihar

मैहर को “माँ शारदा की नगरी” के रूप में भी जाना जाता है। मैहर में घूमने के लिए कई जगह हैं, जो पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं। आज के इस ब्लॉग पोस्ट में हम आपको मैहर के प्रमुख पर्यटन स्थल के बारे में विस्तृत जानकारी देंगे | मैहर में कौन से लोकप्रिय पर्यटन स्थल है क्या खास है वहाँ के बारे में ये सब हम आगे जानेंगे तो चलिए जानते हैं मैहर में प्रमुख पर्यटन स्थल कौन कौन है :-

Table of Contents

माँ शारदा देवी मंदिर – Sharda devi temple, Maihar

मैहर में घुमने की जगह (maihar me ghumne ki jagah)

मैहर की सबसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थल माँ शारदा देवी मंदिर है। यह मंदिर त्रिकूट पर्वत की चोटी पर स्थित है और माता शारदा देवी को समर्पित है। मंदिर में पहुंचने के लिए सीढ़ियां और रोपवे दोनों उपलब्ध हैं। मंदिर से मैहर शहर और आसपास के क्षेत्र का एक शानदार दृश्य दिखाई देता है। माँ शारदा देवी को शक्ति की देवी के रूप में पूजा जाता है। मंदिर में माता शारदा देवी की एक विशाल मूर्ति स्थापित है। मंदिर के परिसर में एक झील भी है, जिसे शारदा सरोवर कहा जाता है। माँ शारदा देवी मंदिर एक लोकप्रिय तीर्थ स्थल है। हर साल हजारों भक्त मंदिर में दर्शन करने आते हैं। मंदिर के पास एक आश्रम भी है, जहां भक्त रुक सकते हैं और आध्यात्मिक साधना कर सकते हैं।

नीलकंठ मंदिर और आश्रम – Neelkanth Temple and Ashram, Maihar

मैहर में घुमने की जगह (maihar me ghumne ki jagah)

नीलकंठ मंदिर और आश्रम मैहर से लगभग 16 किलोमीटर दूर स्थित है। यह मंदिर भगवान कृष्ण और राधा को समर्पित है। मंदिर के पास एक आश्रम भी है, जहां नीलकंठ महाराज ने तपस्या की थी। आश्रम में एक प्राचीन मंदिर भी है, जो भगवान शिव को समर्पित है। नीलकंठ महाराज एक प्रसिद्ध संत थे, जो अपने आध्यात्मिक ज्ञान और दयालुता के लिए जाने जाते थे। उन्होंने कई वर्षों तक इस आश्रम में तपस्या की थी। आश्रम में उनके द्वारा इस्तेमाल किए गए कई धार्मिक वस्तुएं और उनके जीवन से जुड़े अन्य अवशेष संरक्षित हैं। नीलकंठ मंदिर एक सुंदर मंदिर है, जो भगवान कृष्ण और राधा को समर्पित है। मंदिर में भगवान कृष्ण और राधा की सुंदर मूर्तियां स्थापित हैं। मंदिर के परिसर में एक झील भी है, जो एक सुंदर दृश्य प्रस्तुत करती है।

काली माता मंदिर – Kali mata temple, Maihar

मैहर में घुमने की जगह (maihar me ghumne ki jagah)

काली माता मंदिर मैहर शहर के केंद्र में स्थित एक प्रसिद्ध मंदिर है। यह मंदिर काली माता को समर्पित है, जो हिंदू धर्म में शक्ति की देवी के रूप में पूजी जाती हैं। मंदिर में मां काली की एक विशाल मूर्ति स्थापित है। काली माता मंदिर एक लोकप्रिय तीर्थ स्थल है। हर साल हजारों भक्त मंदिर में दर्शन करने आते हैं। मंदिर के पास एक छोटा सा झरना भी है, जो एक सुंदर दृश्य प्रस्तुत करता है। मंदिर का इतिहास 11वीं शताब्दी से शुरू होता है, जब एक संत, बाबा गुरु गोरखनाथ ने यहां तपस्या की थी। कहा जाता है कि मां काली ने उन्हें दर्शन दिए थे और उन्हें यह क्षेत्र दान में दिया था।

त्रिकूट पर्वत – Trikuta Parvat, Maihar

मैहर में घुमने की जगह (maihar me ghumne ki jagah)

त्रिकूट पर्वत मैहर के आसपास का एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। यह पर्वत तीन पहाड़ों का एक समूह है, जो लगभग 3,600 फीट की ऊंचाई पर स्थित हैं। पर्वत पर कई मंदिर और आश्रम स्थित हैं। पर्वत पर चढ़ना एक चुनौतीपूर्ण लेकिन पुरस्कृत अनुभव है। पर्वत के शिखर से मैहर शहर और आसपास के क्षेत्र का एक अद्भुत दृश्य दिखाई देता है। त्रिकूट पर्वत की तीन चोटियों को माता शारदा देवी, भगवान शिव और भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। पर्वत पर कई प्राचीन मंदिर और आश्रम भी हैं, जो कई शताब्दियों से मौजूद हैं। त्रिकूट पर्वत पर चढ़ने के लिए दो रास्ते हैं, एक सीढ़ियों से और दूसरा रोपवे से। सीढ़ियों से चढ़ने में लगभग 3 घंटे लगते हैं, जबकि रोपवे से चढ़ने में लगभग 15 मिनट लगते हैं।

इच्छापूर्ति मंदिर – Ichhapurti Temple, Maihar

मैहर में घुमने की जगह (maihar me ghumne ki jagah)

इच्छापूर्ति मंदिर मैहर में स्थित एक प्रसिद्ध मंदिर है। यह मंदिर दुर्गा देवी को समर्पित है। मंदिर की स्थापना 1962 में की गई थी। मंदिर अपनी अद्वितीय वास्तुकला और नक्काशी के लिए जाना जाता है। इच्छापूर्ति मंदिर मैहर के एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। मंदिर की अद्वितीय वास्तुकला और नक्काशी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है। मंदिर में दुर्गा देवी की एक विशाल मूर्ति भी स्थापित है।

रामपुर पथा – Rampur Patha, Maihar

मैहर में घुमने की जगह (maihar me ghumne ki jagah)

रामपुर पथा मैहर से लगभग 17 किलोमीटर दूर स्थित एक छोटा सा गांव है। गांव में एक प्राचीन शिव मंदिर है। गांव के आसपास कई झरने और प्राकृतिक सुंदरता देखने को मिलती है। रामपुर पथा एक खूबसूरत जगह है, जो प्रकृति प्रेमियों को अपनी ओर आकर्षित करती है। गांव के आसपास कई झरने हैं, जो एक सुंदर दृश्य प्रस्तुत करते हैं। गांव के पास एक प्राचीन शिव मंदिर भी है, जो कई शताब्दियों से मौजूद है।

बड़ा अखाड़ा मंदिर – Bara Akhara Mandir, Maihar

मैहर में घुमने की जगह (maihar me ghumne ki jagah)

बड़ा अखाड़ा मंदिर मैहर में स्थित एक प्रसिद्ध मंदिर है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। मंदिर में भगवान शिव की एक विशाल मूर्ति स्थापित है। मंदिर के परिसर में एक बड़ा अखाड़ा भी है, जहां पहलवान कुश्ती लड़ते हैं। बड़ा अखाड़ा मंदिर मैहर के एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। मंदिर और अखाड़ा दोनों ही पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। मंदिर में भगवान शिव की पूजा करने के लिए हर साल हजारों भक्त आते हैं। अखाड़े में पहलवानों की कुश्ती देखने के लिए भी लोग आते हैं।

गोला मठ मंदिर – Gola math temple, Maihar

मैहर में घुमने की जगह (maihar me ghumne ki jagah)

गोला मठ मंदिर मैहर में स्थित एक प्राचीन मंदिर है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। मंदिर एक ही पत्थर से बना हुआ है और यह अपनी अद्वितीय वास्तुकला के लिए जाना जाता है। गोला मठ मंदिर मैहर के एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। मंदिर की अद्वितीय वास्तुकला पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है। मंदिर में भगवान शिव की एक विशाल मूर्ति भी स्थापित है।

मैहर रोपवे हिल प्वाइंट – Maihar Ropeway Hill Point

मैहर में घुमने की जगह (maihar me ghumne ki jagah)

मैहर रोपेवे टॉप मैहर में स्थित एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है। यह त्रिकूट पर्वत की चोटी पर स्थित है, जो मैहर से लगभग 5 किलोमीटर दूर है। रोपेवे से त्रिकूट पर्वत की चोटी तक जाने में लगभग 10 मिनट लगते हैं। मैहर रोपेवे टॉप से मैहर शहर और आसपास के क्षेत्र का एक शानदार दृश्य दिखाई देता है। यहां से त्रिकूट पर्वत, मैहर देवी मंदिर, बड़ा अखाड़ा मंदिर, और अन्य मंदिरों को देखा जा सकता है।

मैहर किला – Maihar Fort

मैहर में घुमने की जगह (maihar me ghumne ki jagah)

मैहर किला मैहर में स्थित एक ऐतिहासिक किला है। यह त्रिकूट पर्वत की चोटी पर स्थित है, जो मैहर से लगभग 5 किलोमीटर दूर है। किला 12वीं शताब्दी में बनाया गया था और इसे मैहर के राजाओं ने अपने निवास के रूप में इस्तेमाल किया था। मैहर किला एक विशाल किला है, जिसकी दीवारें लगभग 10 मीटर ऊंची हैं। किले में कई मंदिर, महल और अन्य इमारतें हैं। किले की दीवारों से मैहर शहर और आसपास के क्षेत्र का एक शानदार दृश्य दिखाई देता है।

पन्नीखोह जलप्रपात – Pannikhoh Waterfall, Maihar

मैहर में घुमने की जगह (maihar me ghumne ki jagah)

मैहर में घूमने के लिए कई खूबसूरत जगहें हैं, जिनमें से एक पन्नीखोह जलप्रपात है। यह जलप्रपात मैहर से लगभग 16 किलोमीटर दूर स्थित है। पन्नीखोह जलप्रपात एक प्राकृतिक सुंदरता है, जो अपनी ऊंचाई और चौड़ाई के लिए जाना जाता है। पन्नीखोह जलप्रपात लगभग 100 फीट ऊंचा है और 100 फीट चौड़ा है। यह जलप्रपात एक चट्टान से नीचे गिरता है और एक झील में जा मिलता है। झील के किनारे पर एक छोटा मंदिर है, जो त्रिपुरासुंदरी देवी को समर्पित है।

खेरमाई मंदिर – Kheramai Temple, Maihar

मैहर में घुमने की जगह (maihar me ghumne ki jagah)

खेरमाई मंदिर एक प्राचीन मंदिर है, जो 12वीं शताब्दी में बनाया गया था। यह मंदिर माता खेरमाई को समर्पित है, जो एक लोक देवी हैं। खेरमाई मंदिर एक खूबसूरत मंदिर है, जो अपनी वास्तुकला के लिए जाना जाता है। मंदिर का निर्माण लाल बलुआ पत्थर से किया गया है। मंदिर में एक बड़ा गर्भगृह है, जिसमें माता खेरमाई की एक प्रतिमा है। मंदिर के पास एक कुआं भी है, जिसे ‘खेरमाई कुआं’ कहा जाता है। खेरमाई मंदिर घूमने के लिए एक बेहतरीन जगह है। यहां आप प्राकृतिक सुंदरता और ऐतिहासिक महत्व का आनंद ले सकते हैं। यह मंदिर मैहर से लगभग 10 किलोमीटर दूर स्थित है।  

मैहर की कहानी क्या है?

मैहर में घुमने की जगह (maihar me ghumne ki jagah)

मैहर की कहानी पौराणिक कथाओं से जुड़ी हुई है। मान्यता है कि यहां माता सती का हार गिरा था, इसलिए इसे शक्तिपीठ माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव की पत्नी सती ने अपने पिता राजा दक्ष के यज्ञ में अपने पति का अपमान होते नहीं देखा और योगाग्नि से आत्मदाह कर लिया। इस घटना से दुखी होकर भगवान शिव ने सती के शरीर को कंधे पर उठाकर तांडव किया। भगवान विष्णु ने सती के शरीर को 52 भागों में विभाजित किया और उन भागों को पूरे भारत में अलग-अलग स्थानों पर विसर्जित कर दिया। मैहर में माता सती का हार गिरा था। इस स्थान को माँ शारदा शक्तिपीठ के नाम से जाना जाता है। माँ शारदा को ज्ञान और संगीत की देवी के रूप में पूजा जाता है। मैहर में स्थित माँ शारदा मंदिर एक प्रसिद्ध तीर्थस्थल है। नवरात्रि के दौरान यहां लाखों भक्त दर्शन करने आते हैं। मैहर की ऐतिहासिक कहानी भी है। यहां 12वीं शताब्दी में एक किला बनाया गया था। इस किले का निर्माण त्रिपुरासुंदरी देवी के मंदिर की रक्षा के लिए किया गया था। किले में एक मंदिर भी है, जो त्रिपुरासुंदरी देवी को समर्पित है।

FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल) :-

मैहर कहाँ है?

मैहर मध्य प्रदेश के सतना जिले में स्थित एक छोटा सा शहर है। यह शहर विन्ध्य पर्वत श्रेणियों के बीच स्थित है, जो इसे एक सुरम्य स्थान बनाता है। मैहर शहर सतना से लगभग 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

मैहर कब जाना चाहिए?

मैहर जाने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च के बीच होता है। इस दौरान मौसम सुहावना होता है और बारिश नहीं होती है।

मैहर में घूमने के लिए क्या है?

मैहर एक खूबसूरत शहर है, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता, धार्मिक महत्व और ऐतिहासिक महत्व के लिए जाना जाता है। मैहर में घूमने के लिए बहुत सी जगह जिसमे कुछ प्रमुख है – माँ शारदा मंदिर, बड़ा अखाड़ा मंदिर, इच्छापूर्ति मंदिर, मैहर रोपेवे टॉप, मैहर किला, पन्नीखोह जलप्रपात, आल्हा ऊदल का अखाड़ाबड़ी, खेरमाई मंदिर इत्यादि |

मैहर किस लिए प्रसिद्ध है?

मैहर अपने धार्मिक स्थल के लिए प्रसिद्ध है | जिसमे मां शारदा के दर्शन के लिए रोपवे की मदद से भी पहुंचा जा सकता हैं। त्रिकूट पर्वत पर शारदा माता विराजमान हैं। इसके साथ ही मंदिर के परिसर में और भी देवी देवता स्थापित हैं, जिनके दर्शन कर सकते हैं। त्रिकूट पर्वत पर स्थित मैहर मंदिर के चारों तरफ के दृश्य में खूबसूरत पहाड़ देखने को मिलता है।

मैहर के दर्शन कितने बजे से होते हैं?

मैहर के दर्शन सुबह 4:00 बजे से शुरू होते हैं और रात 10:00 बजे तक होते हैं। माँ शारदा मंदिर, बड़ा अखाड़ा मंदिर, और इच्छापूर्ति मंदिर सभी सुबह 4:00 बजे से खुलते हैं और रात 10:00 बजे तक बंद होते हैं। मैहर रोपेवे टॉप सुबह 8:00 बजे से खुलता है और शाम 5:00 बजे तक बंद होता है। मैहर किला सुबह 9:00 बजे से खुलता है और शाम 5:00 बजे तक बंद होता है। हालांकि, नवरात्रि के दौरान, मंदिरों के दर्शन के समय में बदलाव होता है। नवरात्रि के दौरान, मंदिरों के दर्शन सुबह 2:00 बजे से शुरू होते हैं और रात 12:00 बजे तक होते हैं।

मैहर में क्या खास है?

मैहर माँ शारदा देवी के लिए जाना जाता है और इसीलिए मैहर माँ शारदा नगरी के नाम से भी जाना जाता है | मैहर एक प्रमुख धार्मिक स्थल है जहाँ लाखो कि संख्या में श्रधालु माँ के दर्शन करने सालो भर जाते हैं और अपनी मनोकमना करते हैं | इसके साथ साथ यहाँ त्रिकुट की पहाड़ी के भी आकर्षक दृश्य देख सकटे हैं |

मैहर स्टेशन का नाम क्या है?

मैहर स्टेशन का नाम मैहर है। मैहर स्टेशन का कोड MYR है।

मैहर में मेला कब लगता है?

मैहर में कई मेले लगते हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख मेले इस प्रकार हैं:

  • माँ शारदा मेला: यह मेला नवरात्रि के दौरान लगता है। नवरात्रि के दिनों में मैहर में लाखों भक्त आते हैं और माँ शारदा मंदिर में दर्शन करते हैं।
  • बड़ा अखाड़ा मेला: यह मेला हर साल 1 मार्च को लगता है। इस मेले में कुश्ती, दंगल और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
  • इच्छापूर्ति मेला: यह मेला हर साल 15 अगस्त को लगता है। इस मेले में भक्त दुर्गा देवी से मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना करते हैं।

मैहर में रोप वे से जाने का कितना चार्ज कितना है?

मैहर में रोप वे से जाने का चार्ज वयस्क: ₹150, बच्चा (3-12 वर्ष): ₹100, दिव्यांग: निःशुल्क | रोप वे से मैहर जाने का समय लगभग 15 मिनट है। रोप वे की ऊंचाई लगभग 300 मीटर है। रोप वे से आप मैहर शहर और आसपास के क्षेत्र का एक शानदार दृश्य देख सकते हैं। रोप वे का संचालन मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम द्वारा किया जाता है। रोप वे सुबह 8:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक खुला रहता है।

मैहर में माता का कौन सा अंग गिरा था?

मैहर में माता का हार गिरा था। इस स्थान को माँ शारदा शक्तिपीठ के रूप में जाना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, सती के शरीर को जब भगवान विष्णु ने 52 भागों में विभाजित किया था, तो उनमें से एक भाग मैहर में गिरा था। यह भाग माता का हार था।

मैहर में धर्मशाला

मैहर में धर्मशालाओं की एक विस्तृत श्रृंखला उपलब्ध है। कुछ धर्मशालाएं निजी हैं, जबकि अन्य सरकारी हैं। निजी धर्मशालाएं आमतौर पर कम महंगी होती हैं, लेकिन सरकारी धर्मशालाएं अधिक सुविधाएं प्रदान करती हैं। मैहर में कुछ लोकप्रिय धर्मशालाएं इस प्रकार हैं:- स्वरकर धर्मशाला, अवधिया धर्मशाला, चौरसिया धर्मशाला इत्यादि प्रमुख है और भी धर्मशाला है जिसे आप मैहर जाकर बुक कर सकते हैं |

मैहर स्टेशन से मंदिर की दूरी

मैहर स्टेशन से मंदिर की दुरी लगभग 1.5 किलोमीटर है जिसे आप पैदल भी तय कर माँ शारदा देवी मंदिर का दर्शन कर सकते हैं |

मैहर में रुकने की व्यवस्था?

मैहर में रुकने के लिए कई व्यवस्था है जिसमे होटल और धर्मशाला है जिसे आप ऑनलाइन या ऑफलाइन माध्यम से अपने अनुसार बुक कर सकते हैं |

निष्कर्ष (Discloser):

हमने अपने आज के इस महत्वपूर्ण लेख में आप सभी लोगों को मैहर में घूमने की जगह (maihar Me Ghumne ki Jagah) (tourist places in maihar) से सम्बन्ध में विस्तार से जानकारी दी है और यह जानकारी अगर आपको पसंद आई है तो आप इसे अपने दोस्तों के साथ और अपने सभी सोशल मीडिया हैंडल पर शेयर करना ना भूले। आपके इस बहुमूल्य समय के लिए धन्यवाद |

अगर आपके मन में हमारे आज के इस लेख के सम्बन्ध में कोई भी सवाल या फिर कोई भी सुझाव है तो आप हमें कमेंट बॉक्स में बताएं। हम आपके द्वारा दिए गए comment का जवाब जल्द से जल्द देने का प्रयास करेंगे और हमारे इस महत्वपूर्ण लेख को अंतिम तक पढ़ने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद |

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नोट: यह ब्लॉग पोस्ट मैहर के प्रति मेरी आत्मीय भावनाओं का प्रतिबिंब है और इसका उद्देश्य केवल जानकारी साझा करना है।

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