10+ ग्वालियर में घूमने की जगह – Gwalior Tourist Places

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Gwalior Tourist Places:- ग्वालियर एक खुबसुरत पर्यटन स्थल है | यहाँ कई एतेहासिक एवं धार्मिक पर्यटन स्थल के साथ साथ कई किले और स्मारक देखने को मिलेंगे, जो काफी अद्भुत है | हैलो दोस्तों, आज के इस आर्टिकल में हम ग्वालियर में स्थित प्रमुख पर्यटन और धार्मिक स्थल के बारे में जानने वाले हैं, जिसे घूमने के लिए लोग भारत के अलग-अलग शहरो के अलावा विदेशो से भी काफी अधिक संख्या में आते हैं | अगर आप राजगीर घूमने के बारे में (Visit Places in Gwalior) सोच रहे हैं तो हमारे इस आर्टिकल को पूरा आवश्य पढ़ना चाहिए और बताये गए पर्यटन स्थल (Gwalior Tourist Place) को घूमना चाहिए तो चलिए हम अपने इस आर्टिकल में जानकारी की और आगे बढते हैं और ग्वालियर के प्रमुख पर्यटन स्थल (Tourist places in gwalior) और घूमने की जगह (Places to visit in gwalior) के बारे में जानते हैं :- 

ग्वालियर के कुछ रोचक तथ्य:-

  • ग्वालियर का किला – ‘भारत के दुर्गों में मोती’|
  • ग्वालियर किले के चतुर्भुज मंदिर में सबसे पहले जीरो लिखा गया है|
  • ग्वालियर में तानसेन की समाधि पर हर साल तानसेन संगीत समारोह मनाया जाता है |
  • हॉकी के जादूगर ध्यानचंद ग्वालियर के रहने वाले थे |
  • जय विलास पैलेस के एक कालीन को बुनने में करीब 12 साल लगे |

ग्वालियर में घूमने की जगह – Places to visit in Gwalior

ग्वालियर शहर में आपके इंस्टा फीड को एक्सप्लोर करने और जोड़ने के लिए कई खूबसूरत जगहें (Gwalior me ghumne ki jagah) हैं। ग्वालियर के हर विरासत स्थल की एक दिलचस्प और अलग कहानी है जो आपको महाराजाओं और महारानी के युग में वापस ले जाएगी। तो चलिए अपने इस आर्टिकल में आगे बढते हैं और जानते हैं ग्वालियर में सबसे प्रमुख पर्यटन स्थल के बारे में जी निम्नलिखित हैं :-

Table of Contents

ग्वालियर का किला – Gwalior Fort, Gwalior

Gwalior Fort, Gwalior me ghumne ki jagah
Gwalior Fort, Gwalior, Madhya Pradesh

ग्वालियर घूमने कि दृष्टि से एक खूबसूरत जगह है | शहर का सबसे महत्वपूर्ण स्थल, ग्वालियर का  किला है जो बलुआ पत्थर से निर्मित एक उचा महल है | इस किले के अंदर एक तालाब भी है आप किले में जब जाईयेगा तो यहाँ के उत्कृष्ट कलाकारी को देख आप आश्चर्य चकित रह जाईयेगा आपको यहाँ किले के साथ साथ मूर्तियों पर नक्काशी कि कारीगरी देखने को मिलेगी आप यहाँ से जुड़े हुवे महसूस करेंगे तो अपने ग्वालियर के टूर में इस स्थान को आवश्य जोरे |

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जय विलास प्लेस – Jai Vilas Palace, Gwalior

Jai Vilas Palace, Gwalior me ghumne ki jagah
Jai Vilas Palace, Gwalior, Madhya Pradesh

जय विलास पैलेस ग्वालियर शहर कि खूबसूरती को और भी बढ़ा देता है | यहाँ वर्तमान में सिंधिया परिवार निवास करता है, इसमें एक संग्रहालय है जो लगभग 25 कमरों में बना है, जो यहाँ के अतीत को प्रदर्शित करता है | यह पैलेस काफी भव्य और सुन्दर लगता है इसे देखने के लिए दूर दूर से पर्यटक यहाँ आते हैं |

तेली का मंदिर – Teli ka Mandir, Gwalior

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Teli ka Mandir, Gwalior, Madhya Pradesh

ग्वालियर में तेली का मंदिर घूमने लायक जगह है जो द्रविड़ वास्तुकला और जटिल कलाकृति के लिए प्रसिद्ध एक ऐतिहासिक धार्मिक मंदिर है। लोककथाओं के अनुसार, मंदिर का निर्माण तेल व्यापारियों द्वारा दान किए गए धन से किया गया था। इसलिए, इसे तेली का मंदिर के नाम से जाना जाता है । यह लगभग 100 फुट लंबा है, यह भगवान विष्णु को समर्पित है | यहाँ धार्मिक रूचि रखने वाले पर्यटक आते हैं और अपनी मनोकामना मांगते हैं |

मोती महल – Moti Mahal, Gwalior

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Moti Mahal, Gwalior, Madhya Pradesh

ग्वालियर का मोती महल 19वीं सदी का है, जो शहर की सबसे ऐतिहासिक संरचनाओं में से एक है, ग्वालियर में लोग यहाँ घूमने आते हैं यह खूबसूरत बगीचों और फव्वारों से घिरा हुआ है। यह मूल रूप से एक मध्य भारत सरकार का कार्यालय था। इस महल की मुख्य विशेषताओं में दीवार भित्ति चित्र, मोज़ाइक और भव्य तड़के रंग शामिल हैं | यहाँ लाखो कि संख्या में पर्यटक घूमने आते हैं |

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सास बाबु मदिर – Sas Bahu Temple, Gwalior

 Sas Bahu Temple, Gwalior me ghumne ki jagah

ग्वालियर में मशहूर जगह सास-बहू मंदिर, जो ग्वालियर किले के अंदर स्थित है, इसमें दो विस्तृत नक्काशीदार लाल बलुआ पत्थर के मंदिर हैं। भगवान शिव छोटे रूप में प्रतिष्ठित हैं, जबकि भगवान विष्णु बड़े रूप में हैं। इस मंदिर का नाम भगवान विष्णु के अवतार, सहस्त्रबाहु के नाम पर रखा गया है। ग्यारहवीं शताब्दी में, कच्छपघाट वंश के राजा महिपाल ने इस प्रतिष्ठित मंदिर का निर्माण किया था।

गोपाचल पर्वत – Gopachal Parvat, Gwalior

Gopachal Parvat, Gwalior me ghumne ki jagah
Gopachal Parvat, Gwalior, Madhya Pradesh

ग्वालियर किले के अंदर रॉक-कट की एक प्रसिद्ध श्रृंखला गोपाचल पर्वत, प्राचीन जैन प्रतिमाओं को देखने के लिए सबसे अच्छी जगह है। यह सातवीं से पंद्रहवीं शताब्दी तक नक्काशी के साथ रॉक-कट मूर्तियों के संग्रह का स्थान है। यदि आप एक इतिहास या स्थापत्य के दीवाने हैं, तो यह स्थान आपको इसकी भव्यता से प्रभावित करेगा। यहाँ, तीर्थंकरों की मूर्ति को उनके ध्यान के दौरान खड़े या बैठे देखा जा सकता है। जैन धर्म के अनुयायियों के लिए, यह ग्वालियर के सबसे महत्वपूर्ण स्थानों में से एक है। यहाँ भी लोग ग्वालियर में बहुत घूमने आते हैं |

गुजरी महल – Gujari Mahal, Gwalior

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Gujari Mahal, Gwalior, Madhya Pradesh

ग्वालियर में गुजरी महल एक प्रमुख पर्यटन स्थल है जो एक मंदिर है  मंदिर के निर्माण के पीछे एक बहुत ही रोचक कहानी है। मृगनयनी राजा मानसिंह की रानी में से एक थीं। अपनी बहादुर गूजर रानी मृगनयनी के प्रति राजा का प्रेम के प्रतिक में गूजरी महल का निर्माण किया गया था | गुजरी महल के आंतरिक भाग को एक पुरातात्विक संग्रहालय में तब्दील कर दिया गया है, जिसमें दुर्लभ कलाकृतियाँ हैं, जिनमें से कुछ पहली शताब्दी ईस्वी पूर्व की हैं, बाहरी इमारत संरक्षण की लगभग पूर्ण स्थिति में बची हुई है। किले के अंदर कई मध्यकालीन वास्तुकला के चमत्कार देखे जा सकते हैं। यह ग्वालियर में घूमने के लिए एक फेमस जगह है तो आपको यहाँ जरुर जाना चाहिए |

सूर्य मंदिर – Sun Temple, Gwalior

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Sun Temple, Gwalior, Madhya Pradesh

सूर्य मंदिर ग्वालियर का प्रमुख दर्शनीय स्थल है, इसे ग्वालियर का गौरव भी कह सकते हैं । इसका निर्माण 1988 में किया गया था और कोणार्क के सूर्य मंदिर ने इसके डिजाइन के लिए प्रेरणा का काम किया था। मंदिर के लाल बलुआ पत्थर के बाहरी हिस्से इसे भोर और सूर्यास्त की फोटो शूटिंग के लिए आदर्श स्थान बनाते हैं। मंदिर के अंदर मूर्तियों को तराशने के लिए सफेद संगमरमर का इस्तेमाल किया गया है। इस मंदिर को देखने के लिए देश विदेश से पर्यटक आते है यह मदिर इतना भव्य है कि लोगो को ये अपनी ओर आकर्षित करता है |

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सरोद घर – Sarod Ghar, Gwalior

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Sarod Ghar, Gwalior, Madhya Pradesh

सरोद घर ग्वालियर में एक संगीत संग्रहालय है जो मूल रूप से भारत के महान कलाकारों द्वारा उपयोग किए जाने वाले पुराने संगीत वाद्ययंत्रों को प्रदर्शित करता है। आपको पुराने समय के संगीत समारोहों से संबंधित प्राचीन छवियों और अभिलेखों का चयन भी मिलेगा। संग्रहालय प्रसिद्ध सरोद वादक उस्ताद हाफिज अली खान के घर में स्थित है। संग्रहालय में पुराने और आधुनिक वाद्ययंत्रों का संग्रह है जो कभी प्रसिद्ध और निपुण कलाकारों के थे। शास्त्रीय संगीत को संगीतकारों और संगीत प्रेमियों के लिए अधिक सुलभ बनाने के लिए पुस्तकों, लेखों, ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग का एक डेटाबेस संकलित किया जा रहा है। इसे इस अर्थ में देश की सबसे पुरानी संस्थाओं में से एक कहा जा सकता है कि एक शास्त्रीय परंपरा को एक आधुनिक, प्रासंगिक भौतिक आकार और विस्तारित कार्यप्रणाली दी गई थी।

गौस मोहम्मद का मकबरा – Ghaus Muhammed Tomb, Gwalior

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Ghaus Muhammed Tomb, Gwalior, Madhya Pradesh

ग्वालियर में यह एक एतेहासिक जगह है यह प्रारंभिक मुगल-प्रेरित संरचना गौस मोहम्मद की बलुआ पत्थर की कब्र है। वह अफगानिस्तान के राजकुमार थे जो बाद में सूफी संत बने। किंवदंतियों के अनुसार, मोहम्मद गौस मुगल भारत के इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है और कहा जाता है कि बाबर और हुमायूं जैसे मुगल सम्राटों पर उसका बहुत प्रभाव था। उन्हें तानसेन का आध्यात्मिक गुरु भी माना जाता है। कहा जाता है कि तानसेन का संगीत गौस मोहम्मद के संगीत से बहुत अधिक प्रेरित था। नाजुक फीता छिद्रित पत्थर की विधि में बने स्क्रीन विशेष रूप से सुंदर हैं। रेलवे स्टेशन से ग्वालियर किले के रास्ते में, यह हजीरा के करीब है।

तानसेन का मकबरा – Tansen Tomb, Gwalior

Tansen Tomb, Gwalior me ghumne ki jagah
Tansen Tomb, Gwalior, Madhya Pradesh

तानसेन के मकबरे की एक साधारण संरचना मुहम्मद गौस के मकबरे से थोड़ी दूरी पर स्थित है। यह भी ग्वालियर में एतेहासिक घूमने लायक जगह है | तानसेन भारतीय शास्त्रीय संगीत के दिग्गजों और अग्रदूतों में से एक थे और अकबर के शासन के दौरान सबसे प्रसिद्ध गायक थे और दरबार के नौ रत्नों में से एक थे। हर साल नवंबर और दिसंबर में उनकी कब्र पर एक भव्य संगीत कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। यहां, दुनिया भर के संगीतकार और कलाकार महान भारतीय संगीत उस्ताद तानसेन को सम्मानित करने आते हैं। गायन और वाद्य संगीत दोनों के भारत-व्यापी कलाकारों को आमंत्रित किया जाता है।

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FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल):-

ग्वालियर घूमने के लिए कितने दिन चाहिए?

ग्वालियर घूमने के लिए लगभग 2-3 दिनों का प्लान बना कर चले ताकि आप ग्वालियर के सभी दर्शनीय स्थल जैसे-जय विलास पैलेस, ग्वालियर किला, सूर्य मंदिर, तिघरा बांध इत्यादि अच्छी तरह घूम सके|

ग्वालियर में पर्यटन स्थल?

ग्वालियर में पर्यटन स्थल :- जय विलास पैलेस, ग्वालियर किला, सूर्य मंदिर, तिघरा बांध, तेली का मंदिर, मोती महल, गोपाचल पर्वत, साह बहु मंदिर, तानसेन मकबरा, ग्यास मोहम्मद मकबरा, सरोद घर, गुजरी महल इत्यादि प्रमुख है |

जय विलास पैलेस टिकट का प्राइस?

जय विलाश पल्स टिकट का प्राइस भारतीय और विदेशियों के लिए अलग अलग है :-
व्यस्क (भारतीय)                       – 150 रुपया प्रति व्यक्ति
बच्चा (Upto 5 Year)                – Free Entry
Foreigner Entry Fee              – 800 रुपया प्रति व्यक्ति

ग्वालियर घूमने का अच्छा समय?

ग्वालियर में घूमने साल भर जाया जा सकता है। हालांकि, गर्मियों से बचने की सलाह दी जाती है। बिना किसी परेशानी के शहर में घूमने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च के बीच का है, जहां तापमान अधिकतम 21 डिग्री सेल्सियस से लेकर न्यूनतम 4 डिग्री सेल्सियस तक रहता है।

ग्वालियर के प्रमुख पर्यटन स्थल?

ग्वालियर के प्रमुख पर्यटन स्थल :- जय विलास पैलेस, ग्वालियर किला, सूर्य मंदिर, तिघरा बांध, तेली का मंदिर, मोती महल, गोपाचल पर्वत, साह बहु मंदिर, तानसेन मकबरा, ग्यास मोहम्मद मकबरा, सरोद घर, गुजरी महल इत्यादि प्रमुख है |

ग्वालियर क्यों फेमस है?

ग्वालियर कई कारणों से प्रसिद्ध है, इनमे से सबसे यहाँ के लोकप्रिय पर्यटन स्थल जो प्रमुख है – ग्वालियर किला, गुजरी महल, सिंधिया संग्रहालय, जय विलास पैलेस, सूर्य मंदिर, गौस मोहम्मद का मकबरा |

ग्वालियर का मेला कौन से महीने में लगता है?

ग्वालियर का मेला दिसंबर से फरवरी तक लगता है। यह मेला ग्वालियर के मेला ग्राउंड में लगता है। मेले में कई तरह के आकर्षण होते हैं, जिनमें दुकानें, झूले, और मनोरंजन कार्यक्रम शामिल हैं। मेला हर साल लाखों लोगों को आकर्षित करता है। 2023 में, ग्वालियर का मेला 25 दिसंबर से 28 फरवरी तक चला था। 2024 में, मेला 24 दिसंबर से 27 फरवरी तक चलेगा। ग्वालियर का मेला एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है। यह मेला ग्वालियर की समृद्ध संस्कृति और परंपराओं को दर्शाता है।

ग्वालियर में सबसे बड़ा मंदिर कौन सा है?

ग्वालियर में सबसे बड़ा मंदिर चतुर्भुज मंदिर है। यह मंदिर ग्वालियर किले के भीतर स्थित है। यह मंदिर 875 ईस्वी में बनाया गया था और यह भगवान विष्णु को समर्पित है। मंदिर का निर्माण लाल बलुआ पत्थर से किया गया है और यह अपनी वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर में चार गोपुरम हैं, जिनमें से प्रत्येक की ऊंचाई 91 मीटर है। मंदिर में एक विशाल गर्भगृह है, जिसमें भगवान विष्णु की एक विशाल मूर्ति है।

ग्वालियर में कितने महल है?

ग्वालियर में कई महल हैं, जिनमें से कुछ ऐतिहासिक महत्व के हैं। ग्वालियर किले के भीतर स्थित गुजरी महल, जय विलास पैलेस, और चंदन महल कुछ प्रसिद्ध महल हैं।

ग्वालियर के मंदिर

ग्वालियर में कई मंदिर हैं, जिनमें से कुछ ऐतिहासिक महत्व के हैं। ग्वालियर में सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में शामिल हैं:- सूर्य मंदिर, चतुर्भुज मंदिर, सास बहू मंदिर, शिव मंदिर, साईं बाबा मंदिर, इत्यादि |

ग्वालियर में यात्रा कैसे करें?

हवाईजहाज से:- एयर इंडिया के माध्यम से घरेलू उड़ानें नियमित रूप से ग्वालियर हवाई अड्डे से दिल्ली, मुंबई, इंदौर और भोपाल जैसे गंतव्यों के लिए प्रस्थान करती हैं। दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से, जो ग्वालियर से 335 किलोमीटर दूर है, अन्य भारतीय शहरों और कस्बों के साथ-साथ विदेशी देशों के यात्री बाद की उड़ान पकड़ सकते हैं।

रेल द्वारा:- सीधी ट्रेन कनेक्शन के साथ, ग्वालियर भारत के सभी मुख्य शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। नई दिल्ली-भोपाल शताब्दी एक्सप्रेस को नई दिल्ली से ग्वालियर जाने में 3 घंटे लगते हैं। चंडीगढ़, देहरादून, अहमदाबाद, नागपुर, मुंबई, बैंगलोर, हैदराबाद, चेन्नई, तिरुवनंतपुरम, कन्याकुमारी, पटना और कोलकाता सहित कई अन्य शहर सीधे इससे जुड़े हुए हैं। ग्वालियर एक महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशन है जो झाँसी रेल मंडल द्वारा शासित है।

रास्ते से:- कनेक्टिविटी के मामले में ग्वालियर की ओर जाने वाली सड़कें बहुत अच्छी हैं। मध्य प्रदेश के सभी प्रमुख शहर और आसपास के क्षेत्र स्थान से जुड़े हुए हैं। चंदेरी 239 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, लखनऊ और भोपाल दोनों केवल 423 किलोमीटर दूर हैं, और दिल्ली 321 किलोमीटर दूर है।

निष्कर्ष (Discloser):

हमने अपने आज के इस महत्वपूर्ण लेख में आप सभी लोगों को ग्वालियर में घूमने की जगह ( Gwalior Me Ghumne ki Jagah) (tourist places in gwalior) से सम्बन्ध में विस्तार से जानकारी दी है और यह जानकारी अगर आपको पसंद आई है तो आप इसे अपने दोस्तों के साथ और अपने सभी सोशल मीडिया हैंडल पर शेयर करना ना भूले। आपके इस बहुमूल्य समय के लिए धन्यवाद|

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