कैलाश मानसरोवर यात्रा एवं सम्पूर्ण जानकारी – Kailash Mansarovar Yatra

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kailash mansarovar yatra :- कैलाश मानसरोवर यात्रा हिंदुओं, बौद्धों और जैनियों के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक यात्रा है। यह यात्रा तिब्बत के पश्चिमी हिस्से में स्थित कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील की परिक्रमा करती है। कैलाश पर्वत को भगवान शिव का निवास माना जाता है, जबकि मानसरोवर झील को पवित्र माना जाता है।

कैलाश मानसरोवर यात्रा एवं सम्पूर्ण जानकारी - Kailash Mansarovar Yatra

कैलाश मानसरोवर यात्रा रूट – How to go to Kailash Mansarovar Yatra

कैलाश मानसरोवर यात्रा आमतौर पर दो मार्गों से की जाती है:

  • लिपुलेख दर्रा मार्ग: यह मार्ग उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले से होकर जाता है। यह मार्ग अधिक चुनौतीपूर्ण है, लेकिन यह कैलाश पर्वत का एक बेहतर दृश्य प्रदान करता है।
  • नाथू ला दर्रा मार्ग: यह मार्ग सिक्किम के नाथू ला दर्रे से होकर जाता है। यह मार्ग कम चुनौतीपूर्ण है, लेकिन यह मानसरोवर झील का एक बेहतर दृश्य प्रदान करता है।

कैलाश मानसरोवर यात्रा के दौरान घूमने की जगह – Places to Visit Kailash

कैलाश मानसरोवर यात्रा आमतौर पर 25 दिनों तक चलती है। यात्रा के दौरान, तीर्थयात्री विभिन्न धार्मिक स्थलों और प्राकृतिक आकर्षणों का दौरा करते हैं जो अपने आप में काफी अद्भुत है तो चलिए कैलाश मानसरोवर की यात्रा के दौरान कौन कौन से प्रमुख स्थल है जानते हैं | यह यात्रा आपको प्रकृति की सुंदरता, धार्मिक आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक विविधता का अनुभव करने का अवसर देती है।

Table of Contents

लिपुलेख दर्रा – Lipulekh Pass, Kailash Mansarovar Yatra

कैलाश मानसरोवर यात्रा एवं सम्पूर्ण जानकारी - Kailash Mansarovar Yatra

लिपुलेख दर्रा भारत के उत्तराखंड राज्य के पिथौरागढ़ जिले में स्थित एक पर्वत दर्रा है। यह दर्रा भारत और तिब्बत के बीच स्थित है। लिपुलेख दर्रा समुद्रतल से 5,200 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह दर्रा भारत और तिब्बत के बीच एक महत्वपूर्ण व्यापार मार्ग है। लिपुलेख दर्रे का इतिहास प्राचीन काल से रहा है। इस दर्रे का उपयोग प्राचीन काल में व्यापारियों और तीर्थयात्रियों द्वारा किया जाता था। 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद, लिपुलेख दर्रा भारत के नियंत्रण में आ गया। लिपुलेख दर्रा एक महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल है। हर साल हजारों पर्यटक लिपुलेख दर्रे की यात्रा करते हैं। पर्यटक दर्रे की प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेते हैं और स्थानीय संस्कृति के बारे में जानने के लिए उत्सुक होते हैं।

मानसरोवर झील – Mansarovar Lake, Kailash Mansarovar Yatra

कैलाश मानसरोवर यात्रा एवं सम्पूर्ण जानकारी - Kailash Mansarovar Yatra

मानसरोवर झील, जिसे तिब्बती में माफम युत्सो के नाम से जाना जाता है, दुनिया की सबसे ऊंची मीठे पानी की झील है। यह झील भारत और तिब्बत के बीच हिमालय पर्वतमाला में स्थित है। मानसरोवर झील हिंदू, बौद्ध और जैन धर्मों के लिए एक पवित्र स्थल है। मानसरोवर झील समुद्रतल से 4,596 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह झील लगभग 320 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैली हुई है और इसकी परिधि लगभग 88 किलोमीटर है। झील की औसत गहराई 90 मीटर है। मानसरोवर झील का पानी नीला और स्वच्छ है। झील के किनारे पर कई छोटे-छोटे द्वीप हैं। झील में कई तरह के जीव-जंतु पाए जाते हैं, जिनमें मछली, कछुआ और पक्षी शामिल हैं। मानसरोवर झील के आसपास का क्षेत्र बहुत ही खूबसूरत है। यहां कई तरह के हिमालय पर्वत, नदियां और झीलें हैं। मानसरोवर झील के पास ही कैलाश पर्वत भी स्थित है, जिसे हिंदू धर्म में भगवान शिव का निवास माना जाता है।

गौरी कुंड – Gauri Kund, Kailash Mansarovar Yatra

कैलाश मानसरोवर यात्रा एवं सम्पूर्ण जानकारी - Kailash Mansarovar Yatra

गौरी कुंड भारत के उत्तराखंड राज्य के पिथौरागढ़ जिले में स्थित एक पवित्र कुंड है। यह कुंड कैलाश मानसरोवर यात्रा के मार्ग पर स्थित है। गौरी कुंड को देवी पार्वती का निवास माना जाता है। गौरी कुंड समुद्रतल से लगभग 3,600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह कुंड लगभग 50 मीटर लंबा और 30 मीटर चौड़ा है। कुंड का पानी नीला और स्वच्छ है। गौरी कुंड के आसपास का क्षेत्र बहुत ही खूबसूरत है। यहां कई तरह के हिमालय पर्वत, नदियां और झीलें हैं। गौरी कुंड के पास ही गौरा माई का मंदिर भी स्थित है।

राक्षस ताल – Rakshas Tal, Kailash Mansarovar Yatra

कैलाश मानसरोवर यात्रा एवं सम्पूर्ण जानकारी - Kailash Mansarovar Yatra

राक्षस ताल तिब्बत में स्थित एक झील है जो मानसरोवर और कैलाश पर्वत के पास, उनसे पश्चिम में स्थित है। सतलज नदी राक्षसतल के उत्तरी छोर से शुरु होती है। पवित्र मानसरोवर और कैलाश के इतना पास होने के बावजूद राक्षसताल हिन्दुओं और बौद्ध-धर्मियों द्वारा पवित्र या पूजनीय नहीं मानी जाती। राक्षस ताल का क्षेत्रफल लगभग 225 वर्ग किलोमीटर है और इसकी परिधि लगभग 84 किलोमीटर है। झील की औसत गहराई 150 मीटर है। राक्षस ताल का पानी खारा है, जबकि मानसरोवर का पानी मीठा है। राक्षस ताल में कोई मछली या अन्य जलीय जीव नहीं पाए जाते हैं।

नंदी पर्वत – Nandi Parvat, Kailash Mansarovar Yatra

कैलाश मानसरोवर यात्रा एवं सम्पूर्ण जानकारी - Kailash Mansarovar Yatra

नंदी पर्वत भारत के उत्तराखंड राज्य के पिथौरागढ़ जिले में स्थित एक पर्वत है। यह पर्वत कैलाश मानसरोवर यात्रा के मार्ग पर स्थित है। नंदी पर्वत को भगवान शिव के वाहन नंदी का निवास माना जाता है। नंदी पर्वत समुद्रतल से लगभग 5,500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह पर्वत लगभग 5 किलोमीटर लंबा और 2 किलोमीटर चौड़ा है। पर्वत का आकार एक बैल जैसा है। नंदी पर्वत के आसपास का क्षेत्र बहुत ही खूबसूरत है। यहां कई तरह के हिमालय पर्वत, नदियां और झीलें हैं। नंदी पर्वत के पास ही कैलाश पर्वत भी स्थित है।

कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए तैयारी – Preparation for Kailash Mansarovar Yatra

कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए तैयारी करना महत्वपूर्ण है। यात्रा से पहले, आपको निम्नलिखित चीजों की आवश्यकता होगी:

  • एक वैध भारतीय पासपोर्ट: कैलाश मानसरोवर यात्रा केवल भारतीय नागरिकों के लिए ही अनुमति है।
  • कैलाश मानसरोवर यात्रा परमिट: यात्रा शुरू करने से पहले, आपको कैलाश मानसरोवर यात्रा परमिट प्राप्त करना होगा।
  • शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होना: यात्रा चुनौतीपूर्ण है, इसलिए आपको शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होना चाहिए।
  • उचित कपड़े और उपकरण: यात्रा के दौरान, आपको विभिन्न प्रकार की जलवायु का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए, आपको उचित कपड़े और उपकरण साथ रखना चाहिए।

कैलाश मानसरोवर यात्रा के दौरान सावधानियां – Mansarovar Yatra

कैलाश मानसरोवर यात्रा के दौरान, आपको निम्नलिखित सावधानियां बरतनी चाहिए:

  • ऊंचाई की बीमारी से सावधान रहें: यात्रा के दौरान, आपको ऊंचाई की बीमारी का खतरा हो सकता है। इसलिए, आपको ऊंचाई की बीमारी के लक्षणों को पहचानना और उन्हें रोकने के लिए उपाय करना चाहिए।
  • पर्याप्त पानी और भोजन पिएं: यात्रा के दौरान, आपको पर्याप्त पानी और भोजन पीना चाहिए।
  • अपने साथ आवश्यक दवाएं रखें: यात्रा के दौरान, आपको अपने साथ आवश्यक दवाएं रखनी चाहिए।
  • सुरक्षा का ध्यान रखें: यात्रा के दौरान, आपको सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए।

कैलाश मानसरोवर यात्रा का महत्व – Importance of Kailash Mansarovar Yatra

कैलाश मानसरोवर यात्रा हिंदुओं, बौद्धों और जैनियों के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक यात्रा है। यह यात्रा आध्यात्मिकता, शांति और एकता का प्रतीक है। यात्रा के दौरान, तीर्थयात्री अपने आध्यात्मिक विकास के लिए प्रतिबद्ध होते हैं। वे प्रकृति की सुंदरता और सांस्कृतिक विविधता का भी आनंद लेते हैं।

FAQ (कैलाश मानसरोवर के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले सवाल) :-

कैलाश मानसरोवर यात्रा में कितना खर्च आता है?

कैलाश मानसरोवर यात्रा खर्च आपके द्वारा निर्धारित मार्ग और सुविधा के अनुसार लगता है | लिपुलेख दर्रा मार्ग से अगर आप जाते हैं तो अनुमानित खर्च लगभग 1.5 लाख रूपये लगते हैं और आप नाथू दर्रा मार्ग से जानते हैं तो अनुमानित खर्च लगभग 1.75 लाख रूपये का आएगा |

कैलाश मानसरोवर के लिए वीजा चाहिए?

हाँ, कैलाश मानसरोवर जाने के लिए वीजा की आवश्यकता होती है। कैलाश मानसरोवर, तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में स्थित है, जो चीन का एक स्वायत्त क्षेत्र है। इसलिए, भारत से कैलाश मानसरोवर जाने के लिए चीन का वीजा प्राप्त करना आवश्यक है। भारतीय नागरिकों को कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए चीन का वीजा प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित दस्तावेजों की आवश्यकता होती है:

  • पासपोर्ट (कम से कम 6 महीने की वैधता के साथ)
  • 2 पासपोर्ट आकार के फोटो
  • वीजा आवेदन पत्र
  • वीजा शुल्क (600 डॉलर)
  • यात्रा बीमा (कम से कम 10 लाख रुपये का कवरेज)
  • वीजा एजेंट द्वारा प्रमाणित चिकित्सा प्रमाण पत्र

कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए वीजा आमतौर पर 30 दिनों की अवधि के लिए दिया जाता है। वीजा प्राप्त करने के लिए, आपको चीन के दूतावास या वाणिज्य दूतावास में आवेदन करना होगा। कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए वीजा प्राप्त करने की प्रक्रिया में आमतौर पर 2 से 3 सप्ताह लगते हैं। वीजा प्राप्त करने के लिए, आपको अपना आवेदन पत्र और अन्य आवश्यक दस्तावेज जमा करने होंगे। आवेदन पत्र में आपके व्यक्तिगत विवरण, यात्रा के विवरण, और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी शामिल होनी चाहिए।

कैलाश मानसरोवर कहाँ है?

कैलाश मानसरोवर तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में स्थित है, जो चीन का एक स्वायत्त क्षेत्र है। कैलाश पर्वत, जो एक पवित्र पर्वत है, तिब्बत के मध्य में स्थित है। यह पर्वत 6,638 मीटर (21,778 फीट) ऊंचा है और यह एक पिरामिड के आकार का है। मानसरोवर झील, जो एक पवित्र झील है, कैलाश पर्वत के पास स्थित है। यह झील 320 वर्ग किलोमीटर (123.5 वर्ग मील) के क्षेत्र में फैली हुई है और यह 3,500 मीटर (11,483 फीट) की ऊंचाई पर स्थित है।

कैलाश मानसरोवर कब जाना चाहिए?

कैलाश मानसरोवर जाने का सबसे अच्छा समय जुलाई से सितंबर के बीच होता है। इस समय मौसम आमतौर पर अच्छा रहता है और तापमान भी अधिक नहीं होता है। जुलाई से सितंबर के बीच, कैलाश मानसरोवर की परिक्रमा करना भी आसान होता है क्योंकि बर्फ पिघल जाती है और रास्ते साफ हो जाते हैं। हालांकि, कैलाश मानसरोवर किसी भी समय जाया जा सकता है। यदि आप सर्दियों में यात्रा करना चाहते हैं, तो आपको ध्यान रखना होगा कि तापमान बहुत कम हो सकता है।

कैलाश मानसरोवर यात्रा सब्सिडी

वर्तमान में, भारत सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए सब्सिडी देती हैं। भारत सरकार द्वारा आयोजित कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए, पात्र भारतीय नागरिकों को यात्रा के लिए 1 लाख रुपये का सब्सिडी दिया जाता है। यह अनुदान उन सभी भारतीय नागरिकों को दिया जाता है जो कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए आवेदन करते हैं और यात्रा पूरी करते हैं। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए, पात्र भारतीय नागरिकों को यात्रा के लिए 1 लाख रुपये का अनुदान दिया जाता है। यह अनुदान केवल उन भारतीय नागरिकों को दिया जाता है जो उत्तर प्रदेश के मूल निवासी हैं और कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए आवेदन करते हैं और यात्रा पूरी करते हैं। कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए अनुदान प्राप्त करने के लिए, आपको संबंधित राज्य सरकार के धर्मार्थ कार्य विभाग से संपर्क करना होगा।

कैलाश पर्वत कौन से देश के अंदर है?

कैलाश पर्वत चीन देश के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में स्थित है |

कैलाश मानसरोवर किस लिए प्रसिद्ध है?

कैलाश मानसरोवर हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म और जैन धर्म के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। यह तीनों धर्मों में, कैलाश पर्वत को एक पवित्र पर्वत माना जाता है। हिंदू धर्म में, कैलाश पर्वत को भगवान शिव का निवास माना जाता है। बौद्ध धर्म में, कैलाश पर्वत को बुद्ध का निवास माना जाता है। जैन धर्म में, कैलाश पर्वत को तीर्थंकर ऋषभदेव का निवास माना जाता है।

कैलाश पर्वत की परिक्रमा कितने किलोमीटर की है?

कैलाश पर्वत की परिक्रमा लगभग 52 किलोमीटर (32 मील) की है। यह परिक्रमा आमतौर पर 3 से 4 दिनों में पूरी की जाती है। परिक्रमा की शुरुआत और समापन तारचेन शहर से होती है। परिक्रमा के दौरान, तीर्थयात्री कैलाश पर्वत के चारों ओर एक गोलाकार मार्ग का अनुसरण करते हैं।

कैलाश मानसरोवर यात्रा रजिस्ट्रेशन

कैलाश मानसरोवर यात्रा रजिस्ट्रेशन आमतौर पर जनवरी से मार्च के बीच शुरू होता है। रजिस्ट्रेशन के लिए, आपको भारत सरकार के विदेश मंत्रालय की वेबसाइट पर आवेदन करना होगा। रजिस्ट्रेशन करने के लिए Click करे |

कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए कौन पात्र है?

कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए निम्नलिखित पात्रता मानदंड हैं:

  • आप एक भारतीय नागरिक होना चाहिए।
  • आपकी आयु 18 वर्ष से अधिक होनी चाहिए।
  • आपके पास एक वैध पासपोर्ट होना चाहिए जो यात्रा के अंत से कम से कम छह महीने तक वैध हो।
  • आपके पास एक वैध चिकित्सा बीमा होना चाहिए।
  • आप शारीरिक रूप से स्वस्थ और यात्रा शुरू करने के लिए मेडिकल रूप से फिट होने चाहिए।

कैलाश मानसरोवर यात्रा एक चुनौतीपूर्ण यात्रा है। यात्रा के दौरान, तीर्थयात्रियों को ऊंचाई की बीमारी, ठंड, और अन्य मौसम संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए, यह महत्वपूर्ण है कि आप शारीरिक रूप से स्वस्थ हों और यात्रा शुरू करने के लिए मेडिकल रूप से फिट हों। 

निष्कर्ष (Discloser):

हमने अपने आज के इस महत्वपूर्ण लेख में आप सभी लोगों को कैलाश मानसरोवर में घूमने की जगह (kailash mansarovar Me Ghumne ki Jagah) (tourist places in kailash mansarovar) से सम्बन्ध में विस्तार से जानकारी दी है और यह जानकारी अगर आपको पसंद आई है तो आप इसे अपने दोस्तों के साथ और अपने सभी सोशल मीडिया हैंडल पर शेयर करना ना भूले। आपके इस बहुमूल्य समय के लिए धन्यवाद |

अगर आपके मन में हमारे आज के इस लेख के सम्बन्ध में कोई भी सवाल या फिर कोई भी सुझाव है तो आप हमें कमेंट बॉक्स में बताएं। हम आपके द्वारा दिए गए comment का जवाब जल्द से जल्द देने का प्रयास करेंगे और हमारे इस महत्वपूर्ण लेख को अंतिम तक पढ़ने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद |

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नोट: यह ब्लॉग पोस्ट कैलाश मानसरोवर के प्रति मेरी आत्मीय भावनाओं का प्रतिबिंब है और इसका उद्देश्य केवल जानकारी साझा करना है |

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